नीलांजन शनिदेव का मन्दिर लखनऊ कानपुर राजमार्ग पर दक्षिणी लखनऊ में चुंगी से लगभग एक किलोमीटर आगे चौराहा पर हिन्द नगर में अवस्थित है । मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगने वाली दुकानों से पूजा की थाली लेकर आप जैसे ही अन्दर प्रांगण में प्रवेश करेगें , बायीं ओर स्थित नवग्रह मन्दिर में नौ ग्रहों का दर्शन पूजन कर सकते हैं । तदुपरान्त पंक्ति-बद्व होकर शनिपथ पर अग्रसर होते हुये आप शनि मन्दिर के अन्दर स्थित देवप्रतिमा के समक्ष पहुंचकर भगवान शनिदेव को प्रणाम करें उनका तैलाभिषेक करें एवं उन्हें गुड, चने का प्रसाद व अन्य पुष्प आदि सामग्री अर्पित करें, उनका ध्यान करें, प्रार्थना करें, पुन: प्रणाम कर उनकी दायी ओर स्थित हनुमान जी का दर्शन पूजन करें । परिक्रमा मार्ग में प्रथम आपको शीतला माता, संतोषी माता एवं वैष्णों माता के दर्शन होंगे इसी के सामने शनि न्यायालय है जहाँ भक्त अपनी फरियाद सुनतें हैं एवं न्याय की प्रार्थना करतें है । भक्त यहाँ एकांत में बैठकर ध्यान भी करते हैं । आगे बढते हुये देवी देवताओं को प्रणाम करते हुये आप गणेश मन्दिर पहुँचेंगे जहाँ क्रमश: लक्ष्मीनारायण, भगवान गणेश, उमामहेश्वर, कालभैरव, माता सरस्वती, साँईनाथ एवं भगवान विश्वकर्मा की मूर्तियाँ है जिनका दर्शन पूजन बड़ा ही फलदायी होता है । गणेश मंदिर के बाहर दायीं ओर पीपल के पेड़ के नीचे भक्त दीप प्रज्वलित कर आरती करते हैं । एवं शनिदेव को दीप समर्पित करते हैं । जिसमें काला उद्द , काला तिल एवं लोहे की कील भी भेंट स्वरूप अर्पित की जाती है । बायीं ओर माँ भद्रकाली की दिब्य प्रतिमा विराजमान है जिसके सम्मुख माँ के चरण चिन्ह अंकित “चरण स्तम्भ “है ।
भक्त यहाँ शीश झुकाकर माँ की बन्दना, प्रार्थना, पूजन, अर्चना, प्रसाद अर्पण करते हैं एवं माँ का प्रसाद भी ग्रहण करते हैं । माँ भद्रकाली के मन्दिर के सामने ही अमरनाथ गुफा है जहाँ भगवान आशुतोष अवढरदानी शिव लिंग रूप में अपनी भव्यता के साथ परिवार सहित विराजमान है जिनका दर्शन पूजन मन को अलौकिक शान्ति प्रदान करता है । यह अमरनाथ की गुफा एक छोटे से पहाड़नुमा मन्दिर में बनायी गयी है । इसी पहाड़ के उपरी शिखर पर भोलेनाथ प्रतिमा रूप में ध्यानस्थ अवस्था में विराजमान है जिनके ऊपर अविरल गंगा की धवल धार की तरह फव्वारें का जल गिरता रहता है । रात्रि में विद्युतीय प्रकाश में यह जल धारा एक अलौकिक स्वर्गिक दृश्य को उत्पन्न करती है । पेड़-पौधों से घिरे इस सुरम्य वातावरण का दृश्य अत्यन्त ही मोहक होता है । प्रांगण में लगी बेंचों पर बैठकर भक्त इस दृश्य को अवलोकन कर एवं ईश्वर का ध्यान कर आत्मीय सुख का अनुभव करते हैं एवं आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त करते हैं । शनिवार के दिन यहाँ हजारों भक्तों की भीड़ पंक्तिबद्ध होकर शनिदेव का दर्शन पूजन कर अपनें कष्टों से छुटकारा पातें है एवं ईश कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करतें हैं ।
इसके अतिरिक्त इसी प्रांगण में हेमन्तनाथ शिव मन्दिर, गायत्री यज्ञशाला, सूर्य मन्दिर, व्यायामशाला, सूर्यकुंड, सत्संग भवन, गायत्री भवन, पुजारी आवास एवं होम्योपैथिक चिकित्सालय भी है । इस चिकित्सालय में रोगियों का निशुल्क, परीक्षण व उपचार किया जाता है । यहाँ राहगीरों के पानी पीने के लिये हैण्डपम्प पानी की टंकी, ठंडे पानी की रेफ्रीजरेटर युक्त पानी की टंकी तथा पशुओं के पानी पीने के लिए मन्दिर परिसर के बाहर छोटी हौदी (चरही ) का निर्माण कराया गया है ।